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❤️उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है ।
जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है ।।
नयी उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाए ।
कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है।।
Full Poem at Rekhta by Waseem Barelvi
Vocabulary: ख़ुद-मुख़्तार = स्वेच्छाचारी, निरंकुश, मनमानी करनेवाला, स्वतंत्र, स्वाधीन, आज़ाद;
❤️याद रख सिकंदर के हौसले तो आली थे,
जब गया था दुनिया से दोनों हाथ खाली थे।
❤️वो पूछ लें हमसे कि किस बात का गम है (x2),
तो किस बात का गम है अगर वो पूछ लें हमसे ।
(Rekhta)
❤️सितारों के आगे जहाँ और भी हैं
इशक के इमतहां अभी और भी हैं।
जो प्रेम गली में आए नहीं, वे प्रियतम का ठिकाना क्या जानें?
जिसने प्रेम कभी किया ही नहीं, वह प्रेम निभाना क्या जाने।
❤️अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा - by वसीम बरेलवी on Rekhta
My Originals:
Harivansh Rai Bachchan: