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Poetry

6 May 2026

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  1. ❤️उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है ।
    जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है ।।

    नयी उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाए ।
    कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है।।

    • Vocab: ख़ुद-मुख़्तार = स्वतंत्र, आज़ाद, अपनी मर्जी के मालिक, अपने फैसले खुद लेना, अपनी जिंदगी अपनी शर्तों पर जीना, मनमानी करनेवाला, स्वाधीन, स्वेच्छाचारी, निरंकुश; autonomous, independent, self-governed, or sovereign.
    • Full Poem at Rekhta by Waseem Barelvi, Narrated by वसीम बरेलवी, Narrated by Vikas Divyakirti
  2. ❤️याद रख सिकंदर के हौसले तो आली थे,
    जब गया था दुनिया से दोनों हाथ खाली थे।

  3. ❤️वो पूछ लें हमसे कि किस बात का गम है (x2),
    तो किस बात का गम है अगर वो पूछ लें हमसे ।
    (Rekhta)

  4. ❤️सितारों के आगे जहाँ और भी हैं
    इशक के इमतहां अभी और भी हैं।

  5. जो प्रेम गली में आए नहीं, वे प्रियतम का ठिकाना क्या जानें?
    जिसने प्रेम कभी किया ही नहीं, वह प्रेम निभाना क्या जाने।

  6. ❤️अपने हर हर लफ़्ज़ का ख़ुद आईना हो जाऊँगा - by वसीम बरेलवी on Rekhta

  7. ❤️इश्क़ ने ‘ग़ालिब’ निकम्मा कर दिया
    वर्ना हम भी आदमी थे काम के। ~ मिर्ज़ा ग़ालिब

My Originals:

  1. तोते उड़ गए, तुम भी उड़ जाओ, हमें भी उड़ने दो, नहीं तो पिंजरा तोड़ देंगे।
    ये ज़िंदगी इश्क़-मोहब्बत की भूखी है, दे दो नहीं तो छीनना इसकी फ़ितरत है, तोते उड़ाकर ही मानेगी।

Harivansh Rai Bachchan: